दोस्तों,
हमारे देश भारत की जलवायु अन्य विकसित देशों से बिल्कुल भिन्न है। यहां पर लोग मेहनती हैं, किसान और मजदूर वर्ग शरीर से मेहनत करते हैं। मशीनों के भरोसे नहीं रहते। हमारे देश की धरती हमें कितना कुछ देती है, अलग-अलग ऋतु में अलग-अलग फल सब्जी और अनाज। हर तरह के पोषक तत्वों से भरपूर है हमारे देश का खानपान। भारत की अपनी एक प्राकृतिक संपदा है जिसे हमें समझना चाहिए। भारतीयों के पास योग है, प्राणायाम है, आयुर्वेद है। इनकी सहायता से हम स्वत: ही पूर्ण स्वस्थ रह सकते हैं। सूरज की कड़ी धूप है जो वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करने की ताकत रखती है। बीमारियों से लड़ने के लिए और बचने के लिए हमें वैक्सीनेशन टीकाकरण की आवश्यकता कितनी है यह सोचना चाहिए।
वैक्सीनेशन अर्थात टीकाकरण की प्रणाली जब से शुरू हुई है तब से आज तक बीमारियां बड़ी ही है घटी नहीं है। नए नए रूप लेकर नए नए नामों से बीमारियां आई है, कम नहीं हुई है।
कोरोनावायरस म्यूटेट होता है अर्थात रुप बदलता है।
इसके लिए डॉक्टर विश्वरूप और कुछ अन्य जानकार लोगों ने जनवरी 2020 से बताया कि म्यूटेशन के कारण इस कोविड-19 बीमारी के लिए कोई एक स्पेसिफिक दवा हो नहीं सकती और न ही कोई प्रभावी वैक्सीन बन सकती है।
अभी दुनिया भर में कई बड़ी-बड़ी कंपनियों के वैक्सीन बन चुके है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह वैक्सीन साउथ अफ्रीका में नए वायरस कोरोनावायरस को रोकने में सफल होगा कि नहीं कह नहीं सकते यह टाइम्स ऑफ इंडिया की न्यूज़ देखिए

और यह न्यूज़ भी देखिए जिससे साफ पता चलता है कि वैक्सीनेटेड अर्थात वैक्सीन लगने के बाद भी लोगों को कोरोनावायरस का इंफेक्शन हो सकता है चाहे वह थोड़े रूप में ही क्यों न हो।

इसका मतलब यही है कि वैक्सीनेशन से हमें विशेष कोई फायदा होने वाला नहीं है और डब्ल्यूएचओ का भी कहना है कि वैक्सीनेशन के बाद भी आपको सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनना जरूरी ही होगा।
यूके (UK) पहला देश था जहां फाइजर कंपनी का वैक्सीन लगना शुरू हुआ। शुरुआती दिनों में ही 2 व्यक्तियों को वैक्सीन लगने के 15 मिनट बाद ही एलर्जिक रिएक्शन हो गए और ब्रिटेन के मेडिसिन रेगुलेटर को एक खास चेतावनी जारी करना पड़ा। और ऐसे ही एलर्जिक रिएक्शंस यूनाइटेड स्टेट्स (US) में भी देखने को मिले। और एक नर्स तो वैक्सीन लेने के बाद लाइव इंटरव्यू देते देते ही बेहोश हो गई। यह लिंक देखिए👇
https://indianexpress.com/article/world/covid-19-vaccination-guideline-us-cdc-7112016/
और तारीख 6 जनवरी 2021 राजस्थान पत्रिका की खबर है कि पुर्तगाल के पोर्टो की एक 40 वर्षीय नर्स सोनिया की फाइजर कंपनी का टीका लगवाने के बाद मौत हो गई।

हमारे देश में हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भारत की कोवैक्सीन लगवाई थी और लगवाने के 15 दिन बाद ही वह कोविड-19 पाए गए, गंभीर बीमार हो गए। काफी दिनों तक इलाज चला गुड़गांव मेदांता हॉस्पिटल में और रिकवरी होने में बहुत टाइम लगा, महीना भर से भी ज्यादा लगा।

चेन्नई के एक वॉलिंटियर की टीका लगने के बाद तबीयत बिगड़ी और कंपनी ने जब कोई सुध नहीं ली तब उन्हें केस करना पड़ा।
ऑर 8 जनवरी 2021 की प्राइम टाइम रवीश कुमार की यह रिपोर्ट देखिए।
देश में यह है वैक्सीन लगने के बाद पहली मौत भले ही हो पर वैक्सीन के असर पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।अभी तो 9 दिन बाद मौत हुई है। वैक्सीन लगने के 1 महीना बाद दो महीना बाद 3 महीना बाद क्या रिजल्ट रहेंगे यह तो वक्त ही बताएगा।
भारतीयों को बीमारी से तो डर कम है पर वैक्सीन से डर ज्यादा है।

कोविड-19 बीमारी से तो हम लोग लड़ लेंगे पर वैक्सीन के बुरे असर से खुद को बचाने में हमें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
दोस्तों, हमारे देश के लोगों का इम्यून सिस्टम अन्य विकसित देशों के लोगों से ज्यादा मजबूत है। और फिर इस बीमारी से,कोविड-19 बीमारी से हमारे देश के अधिकतर लोग इम्यून हो चुके हैं, ऐसे में यह आर्टिकल पढ़िए।
Majority Indians have natural immunity. Vaccinating entire population can cause great harm
सोचिए
समझिए
धन्यवाद
सुषमा बैंगानी

